निवेशकों का भरोसा: तमिलनाडु में दो-दिवसीय ‘ग्लोबल इन्वेस्टर्स मीट’, जीआईएम 2024

तमिलनाडु को आर्थिक वृद्धि से जुड़ी अपनी आकांक्षाओं को जमीन पर किए जाने वाले काम से जोड़ना होगा

January 10, 2024 09:22 am | Updated 09:22 am IST

दो-दिवसीय ‘तमिलनाडु ग्लोबल इन्वेस्टर्स मीट’ (जीआईएम 2024) के दौरान 631 समझौता ज्ञापनों (एमओयू) के जरिए उद्योग जगत के नेतृत्वकर्ताओं को 6.64 लाख करोड़ रुपये के निवेश के लिए प्रतिबद्ध करके एम.के. स्टालिन सरकार रोजगार सृजन के रास्ते राज्य को आर्थिक वृद्धि की राह पर आगे बढ़ाने के लिए संकल्पित लगती है। प्रत्यक्ष रोजगार के 15.4 लाख अवसर समेत 26.90 लाख अतिरिक्त नौकरियों के सृजन का यह अनुमान एक आर्थिक ‘पावर हाउस’ के रूप में तमिलनाडु की छवि और सुदृढ़ करने की मंशा से पेश किया गया है। सिर्फ संख्याओं पर जाएं तो, 2024 के इस सम्मेलन ने 2015 और 2019 में सामने आये नतीजों को बौना कर दिया है। इसने हरित ऊर्जा, ई-वाहन (ईवी), गैर-चमड़ा आधारित जूते-चप्पल, वाहन, उन्नत इलेक्ट्रॉनिक विनिर्माण, रक्षा व एयरोस्पेस और समय की कसौटी पर खरे सूचना तकनीक व डिजिटल सेवाओं में निवेश आकर्षित किये हैं। महत्वपूर्ण बात यह है कि विकसित चेन्नई और कोयंबटूर के इलाकों से परे जाकर, ये निवेश पूरे राज्य में फैले हुए होंगे, जिसमें राज्य का सुदूर निचला दक्षिणी इलाका भी शामिल है। श्रेणी-2 एवं श्रेणी-3 वाले शहरों व कस्बों में कारोबार-समर्थक बुनियादी ढांचा निर्मित करने का यह कदम संतुलित क्षेत्रीय विकास का मार्ग प्रशस्त कर सकता है और उन शहरी केंद्रों में प्रवासन को आंशिक रूप से रोक सकता है जो पहले ही आबादी के बोझ से पस्त हैं। इस सम्मेलन में नौ उन्नत राष्ट्र साझेदार के रूप में शामिल हुए और 30 से ज्यादा देश प्रतिभागी रहे। यह सम्मेलन की वैश्विक प्रकृति ही है जिसने वियतनाम के अग्रणी ईवी निर्माता विनफास्ट जैसे नये प्रवेशकर्ताओं को तमिलनाडु के रास्ते भारतीय बाजार में दाखिल होने का मौका लपकने के लिए प्रेरित किया है। हुंडई, टाटा, अडाणी, क्वालकॉम और सेंट गोबेन समेत कई बहुराष्ट्रीय और घरेलू समूहों का अपनी मौजूदगी के विस्तार के लिए उत्सुक होना, तमिलनाडु की आर्थिक और शासकीय आबोहवा में निवेशकों के भरोसे के स्तर को दिखलाता है।

इन सबके बावजूद, निवेश के लिए रुचि की अभिव्यक्ति और एमओयू को अमलीजामा पहनाने लायक हकीकत में बदलने के बीच हमेशा एक स्पष्ट खाई रहती है। समय-संबंधी और जमीनी बाध्यताओं जैसे बहुत से कारकों के चलते, उत्साह-जगानेवाले निवेशक सम्मेलनों के साथ अमूमन यही देखने को मिलता है। वर्ष 2030 तक तमिलनाडु को एक ट्रिलियन (दस खरब) डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने की आकांक्षा को कार्रवाई के साथ जोड़ने की जरूरत है – एक ‘विजन ब्लूप्रिंट’ जारी करना इस दिशा में पहला कदम है। मुख्यमंत्री ने निवेशकों को अपने दफ्तर तक पहुंच मुहैया कराने और परियोजनाओं के लिए तमाम मंजूरियां एक सिंगल विंडो सिस्टम (जिसकी निगरानी उद्योग मंत्री की अध्यक्षता वाली विशेष समिति के पास होगी) से प्रदान करने की सार्वजनिक गारंटी दी है। यह अपने विजन के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता का स्वागत-योग्य प्रदर्शन है। एक मुख्य चुनौती यह सुनिश्चित करना होगा कि संभावित निवेशकों को अपनी परियोजनाएं स्थापित करने के लिए बड़े भूखंड मिल सकें। हाल के वर्षों में, बुनियादी ढांचे से जुडी परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण के क्रम में तमिलनाडु ने चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। इसके साथ ही, सभी एमओयू का ब्योरा पारदर्शिता के साथ साझा करने और उनकी प्रगति के बारे में समय-समय पर अद्यतन जानकारी (अपडेट) देने से उद्योग जगत का भरोसा और बढ़ेगा।

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