हटा अड़ंगा: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् ने अब्दुर रहमान मक्की को प्रतिबंधित आतंकवादी माना 

चीन को पाकिस्तान के चार और आतंकवादियों को सूचीबद्ध करने में अडंगा हटा देना चाहिए

January 18, 2023 11:22 am | Updated 11:22 am IST

चीन ने लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) के उप-सरगना अब्दुर रहमान मक्की के नाम को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् (यूएनएससी) की प्रतिबंधित आतंकवादियों की सूची में डालने पर पिछले साल जो “तकनीकी रोक” लगाई थी उसे वापस लेने के बाद, अब मक्की का नाम इस सूची में जुड़ गया। भारत ने इस कदम का स्वागत किया है। 26/11 के मास्टरमाइंड हाफिज सईद का बहनोई मक्की, भारत में आतंकी हमलों को अंजाम देने और पाकिस्तान में आतंकवादियों को समर्थन देने की वजह से भारत और अमेरिका की मोस्ट वांटेड की सूची में शामिल है। मक्की को संयुक्त राष्ट्र की इस सूची में शामिल करने की प्रक्रिया में बीते जून चीन द्वारा लगाई गई रोक, पाकिस्तान में सक्रिय एलईटी/जैश-ए-मोहम्मद (जेईएम) के आतंकवादियों से जुड़े इसी तरह के प्रस्तावों पर लगाए गए पांच और अड़ंगे की ही तरह थी। नई दिल्ली ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया जताई थी। उसने चीन पर आतंकवाद को लेकर “दोहरा रवैया” अपनाने और यूएनएससी के आतंकवाद विरोधी तंत्र का “मजाक” बनाने का आरोप लगाया। उस लिहाज से देखें तो मक्की को सूचीबद्ध करने में चीन की मंजूरी, भारत के लिए एक जीत है। ऐसा पहली दफा हुआ है कि जिस लिस्टिंग प्रस्ताव का भारत सह-प्रस्तावक हो उसे पारित करने की मंजूरी मिली। साथ ही, ऐसा पहली बार हुआ है कि किसी आतंकवादी को मुख्य रूप से भारत और खास तौर पर कश्मीर पर किए गए हमलों की वजह से सूचीबद्ध किया गया। इससे पहले जिन आतंकवादियों का नाम इस सूची में शामिल किया गया उसका मुख्य कारण उनमें से ज्यादातर का संबंध अल-कायदा से होना या फिर दुनिया के अन्य हिस्सों में हमला करना था। यह स्पष्ट नहीं है कि चीन को किस वजह से पीछे हटना पड़ा, क्योंकि यूएनएससी के 14 अन्य सदस्यों द्वारा इस लिस्टिंग पर सहमति देने के बावजूद चीन लगातार अड़ंगा लगाता रहा है। पुलवामा हमले को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठी आलोचनाओं की आवाज के बाद, 2019 में चीन ने जेईएम सरगना मसूद अजहर को इस सूची में शामिल करने पर मंजूरी दी, जिसकी मांग भारत दशक भर से कर रहा था। चीनी विदेश मंत्रालय ने मक्की के सूचीबद्ध किए जाने को “अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आतंकवाद विरोधी सहयोग बढ़ाने के लिए वाजिब” कदम बताने के साथ-साथ कहा कि इससे आतंकवाद के खिलाफ पाकिस्तान की लड़ाई को “मान्यता” मिली है।

भारत अपने अनुभव से जानता है कि यूएनएससी में आतंकवादियों को सूचीबद्ध करने का मतलब है उसकी संपत्ति जब्त होना, यात्रा और हथियारों पर प्रतिबंध लगना। यह उन्हें सजा दिलाने की तरफ बढ़ाया गया सिर्फ एक कदम है। पाकिस्तान ने इस सूची में शामिल बड़े हमलों को अंजाम देने के आरोपी आतंकवादियों में से एक पर भी अपनी तरफ से कोई कार्रवाई नहीं की है। चाहे वह 1999 का आईसी-814 कंधार अपहरण कांड हो या मुंबई का 26/11 हमला या फिर पठानकोट और पुलवामा हमला। नई दिल्ली को पूरा जोर लगाकर मक्की और अन्य लोगों का असली चेहरा पूरी दुनिया के सामने लाने के मुश्किल काम पर लगातार जुटे रहना होगा, ताकि इन लोगों पर कार्रवाई करने के लिए पाकिस्तान पर दबाव बना रहे। यह संभव है कि मक्की की लिस्टिंग, एलएसी पर जारी गतिरोध में उलझे रिश्तों के बीच भारत-चीन के पर्दे के पीछे की बातचीत का नतीजा हो। भारत की तरफ से प्रस्तावित चार अन्य आतंकवादियों को सूचीबद्ध करने को लेकर चीन इस पर कार्रवाई करेगा या नहीं और करेगा तो उसका रुख क्या रहेगा, यही इस कूटनीति की असली परीक्षा होगी। ये आतंकवादी हैं हाफिज सईद का बेटा तल्हा, 26/11 हमले का संचालक साजिद मीर, लश्कर में नए लोगों को भर्ती करने वाला शाहिद महमूद और आईसी-814 विमान अपहरण मामले में वांछित अब्दुल रऊफ अजहर (मसूद अजहर का भाई)।

This editorial was translated from English, which can be read here.

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